Tuesday, November 6, 2018

अफ़ग़ानिस्तान में अगवा हुए भारतीयों की कहानी

राज्याभिषेक के बाद भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण व श्री हनुमान सहित समूचे राम दरबार को मोटर बोट पर बिठाकर सरयू नदी की सैर कराई जाएगी. इसके अलावा सरयू के तट पर रिकॉर्ड स्तर पर दीपदान कराने के लिए भी तैयारियां की जा रही हैं.
वहीं अयोध्या शहर के लोगों का इस पूरे आयोजन के बारे में रवैया काफ़ी हद तक उदासीन है तो दूसरी ओर इतने महंगे कार्यक्रम के बावजूद शहर में विकास का ऐसा कोई कार्य नहीं दिख रहा है जिसका लाभ अयोध्यावासियों को हो सके.
कार्यक्रम स्थल से मुख्य शहर की ओर जाने वाली सड़क में पहले की ही भांति गड्ढे हैं और देर रात तक सड़क की मरम्मत का कार्य चल रहा था.
यही नहीं, मुख्य कार्यक्रम स्थल पर, जहां रात के वक़्त ख़ूबसूरत लेज़र प्रकाश पड़ने से दीवारें चमक रही थीं, वहीं उन दीवारों के नीचे की सड़कें न सिर्फ़ टूटी हुई हैं, बल्कि जगह-जगह सीवर लाइन तक की पटरियां उखड़ी हैं. ये बड़े गड्ढे किसी बड़ी दुर्घटना को भी दावत दे रहे हैं.
वहीं अयोध्या के मुस्लिम बहुल इलाके कोटिया पांजीटोला में भी लोग इस आयोजन से बेफ़िक्र दिखते हैं.
पूछने पर एक युवक रिज़वान कहते हैं, "यहां हमेशा त्योहार मनाए जाते हैं और हम मिल-जुलकर मनाते हैं. चाहे वह होली-दीवाली हो या फिर ईद-बकरीद. अब सरकार मना रही है तो वह भी ठीक है, लेकिन इस कार्यक्रम में अयोध्या के कितने लोग पहुंच पाते हैं, ये बड़ा सवाल है. सब बाहर के लोग आते हैं और पुलिस उन्हीं की सुरक्षा में लगी रहती है."
मोहम्मद शाहिद इस बात से तो इत्तेफ़ाक रखते हैं कि पिछले साल जब आयोजन हुआ था, तब से लेकर अब तक थोड़ा बहुत विकास ज़रूर हुआ है, लेकिन उनके मुताबिक, विकास दिया जलाने से नहीं बल्कि कुछ करने से होगा.
बहरहाल, दक्षिण कोरियाई मेहमान अयोध्या आ चुके हैं और मुख्य अतिथि के तौर पर वहां के राष्ट्रपति की पत्नी मंगलवार को आयोध्या आएंगी. बीती रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें रात्रिभोज दिया.
आयोध्या के बाहरी हिस्से में मंगलवार को जहां भव्य दीपोत्सव का आयोजन होगा तो अयोध्या के लोग हार साल की तरह अपने ढंग से दीपावली मनाने की तैयारी में हैं.
कुछ को आशंका है कि भव्य आयोजन वो देख पाएंगे या नहीं तो वहीं कुछ इन सब बातों से पूरी तरह बेफ़िक्र हैं.फ़ग़ानिस्तान में अज्ञात बंदूकधारियों ने इसी साल 6 मई को भारतीय मजदूरों का अपहरण किया गया था. इनमें से चार लोग झारखंड के हैं.
इनमें बगोदर प्रखंड के घाघरा गांव निवासी प्रकाश महतो, प्रसादी महतो, महूरी गांव के हुलास महतो और टाटीझरिया प्रखंड के बेडम गांव निवासी काली महतो शामिल हैं.
ये सभी अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय उद्योगपति हर्ष गोयनका के स्वामित्व वाली कंपनी केइसी इंटरनेशनल के लिए काम करते थे.
विदेश मंत्री के हस्तक्षेप के बाद कंपनी ने अगवा किए गए मज़दूरों के परिजनों को वेतन देना शुरू कर दिया है. हालांकि परिजनों को मीडिया से बात नहीं करने की हिदायत दी गई है.
अपहरण के तुरंत बाद कंपनी ने इस प्रकरण पर आज तक अपना आधिकारिक पक्ष नकेइसी इंटरनेशनल आरपी गोयनका (आरपीजी) समूह की कंपनी है जिसे अफ़ग़ानिस्तान में बिजली की ट्रांसमिशन लाइन लगाने का ठेका मिला हुआ है. वहां काम करने के लिए झारखंड के कई लोग अफ़ग़ानिस्तान गए हैं. इनमें से अधिकतर लोग बगोदर के हैं.

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